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फर्जी डिग्री के आधार पर जिला चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्ति के मामले में झोलाछाप डाक्टर शुभम अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के जिला न्यायालय के आदेश


जबलपुर। जिला न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) सुश्री पलक श्रीवास्तव ने अपने पारित आदेश में कहा है कि यह परिवाद भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 471, 120बी, 34, मप्र आयुर्विज्ञान परिशद अधिनियम की धारा 24(2) तथा मप्र चिकित्सा शिक्षा अधिनियम की धारा 8(1) व 8(2) का प्रस्तुत किया गया है, जो कि आपराधिक दुर्विनियोग एवं छल तथा कूटरचना जैसे गम्भीर अपराधों से संबंधित है। चूंकि यह प्रकरण गम्भीर प्रकृति का प्रकरण है, परिवाद में उल्लेखित धारा संक्षेय हैं। प्रस्तुत परिवाद में उल्लेखित अपराध की घटना की उचित जांच एवं विवेचना पुलिस के द्वारा की जाना अपरिहार्य है। अतः आवेदक की ओर से प्रस्तुत परिवाद के संबंध में दंण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदक की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र को स्वीकार किया जाता है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि परिवादी शैलेन्द्र बारी द्वारा सिविल लाइन पुलिस थाने को मय दस्तावेज परिवाद की प्रति उपलब्ध करायी जाकर संबधित थाना प्रभारी द्वारा अनवोदक क्रमांक 1 शुभम अवस्थी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध की जाए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री गुप्ता द्वारा न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष तर्क दिया था कि शिवसेना के प्रांतीय उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बारी द्वारा जाली और मनगढ़ंत डिग्री के आधार पर जबलपुर जिला अस्पताल में डाक्टर के पद को हासिल करने जैसे गंभीर मामले के संबंध में संबंधित थाने को शिकायत दर्ज की थी परन्तु उनके द्वारा एफआईआर दर्ज करके जांच नहीं की जा रही है। अधिवक्ता श्री गुप्ता का तर्क था कि विक्टोरिया अस्पताल में चिकित्सक की नियुक्ति पाने के लिए झोलाछाप डाक्टर शुभम अवस्थी ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से आयुर्वेद स्नातक की कूटरचित डिग्री बनाकर पेश की थी। उस डिग्री में अवस्थी ने यह झूठ भी छलपूर्वक अंकित किया था कि उसने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जबलपुर से पढ़कर यह डिग्री प्राप्त की थी। इतना ही नहीं, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवस्थी के द्वारा मध्यप्रदेश आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड भोपाल में ऑफलाइन पंजीयन मूड से पंजीयन क्रमांक 56970 प्राप्त किया जबकि इस नंबर पर वास्तव में डॉक्टर इरम जहां मंसूरी का नाम रजिस्टर में दर्ज है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को धोखा देकर शुभम अवस्थी के द्वारा आयुष चिकित्सक का पद और वेतन प्राप्त कर करीब 1 साल तक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया। शुभम अवस्थी झोलाछाप डॉक्टर होने पर भी स्वयं के नाम के आगे डाक्टर लिखता है। उसके द्वारा अल्टरनेटिव सिस्टम आफ मेडिसिन के स्नातक व स्नातकोत्तर की फर्जी डिग्री बनाई और उसमें अपने नाम के आगे डाक्टर लिखा जो कि कानूनन वह नहीं लिख सकता था। याचिकाकर्ता के द्वारा शिकायत दर्ज किए डेढ़ साल से अधिक समय होने पर भी जिम्मेदारों द्वारा कोई कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की है। *याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री गुप्ता के तर्कों को सुनकर जिला न्यायालय द्वारा सिविल लाइन थाना प्रभारी को शुभम अवस्थी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर 5 अप्रैल तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

60 दिन के अंदर आदेश पारित करने के हाईकोर्ट के निर्देश के पालन में जिला न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को आदेश जारी किए -

गौरतलव है कि शैलेन्द्र बारी द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका में उनके अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने बताया था कि जबलपुर जिला न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के समक्ष सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत याचिकाकर्ता द्वारा दायर आवेदन पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित है और पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा रही है। जिस पर उच्च न्यायालय ने संबंधित जेएमएफसी को आदेश दिया था कि वह आवेदक द्वारा सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत दायर आवेदन पर 60 दिनों की अवधि के भीतर कानून के अनुसार निर्णय ले।

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