चंद वर्षों में मामूली कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल बना करोड़ को आसामी विभागीय रहमों करम आय से अधिक संपत्ति कंप्यूटर ऑपरेटर ने कर लि अर्जित
- devanshbharatnews

- 29 दिस॰ 2025
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जनपद पंचायत लोक सूचना अधिकारी ने आवेदक को उपलब्ध कराई अधूरी जानकारी सवालों के घेरे में लोक सूचना अधिकारी
संपादक प्रशांत वैश्य
देवांश भारत डिंडोरी । जिले में जिम्मेदार अधिकारी ही सूचना के अधिकार अधिनियम का पालन करते नजर नहीं आ रहे है यहां सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी आवेदक को आधी अधूरी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है तो वही कहना गलत नहीं होगा विभागीय सांठगांठ का ही परिणाम है जो मूल जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही, परिणाम स्वरूप लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार का यह खेल डिंडोरी जनपद पंचायत में चल रहा है जिसका आज हम खुलासा करने जा रहे हैं

त्रिलोक सिंह चौहान ने लगाई आरटीआई
बतला दें कि आवेदक त्रिलोक सिंह चौहान के द्वारा जनपद पंचायत डिंडोरी में दिनांक 29.7.2025 को सूचना के अधिकार का आवेदन पत्र प्रस्तुत करते हुए डिंडोरी जनपद कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने वाले पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति का आधार को लेकर जानकारी मांगी गई थी जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल के द्वारा उपलब्ध कराए गए संपूर्ण दस्तावेजों की मांग की गई लेकिन जनपद पंचायत डिंडोरी के जिम्मेदार लोक सूचना अधिकारी द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति से संबंधित किसी भी प्रकार का दस्तावेज आवेदक को उपलब्ध नहीं कराया
किस मद से होता है कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल को मानदेय भुगतान
आवेदक त्रिलोक सिंह चौहान के द्वारा अपने सूचना के अधिकार आवेदन पत्र में मांग की गई थी कि कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल को जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा किस मद से मासिक मानदेय का भुगतान जिसकी संपूर्ण जानकारी की मांग आवेदन पत्र में की गई लेकिन लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा पत्र के माध्यम से आधी अधूरी जानकारी उल्लेखित करते हुए बतलाया कि पुरुषोत्तम चंदेल कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रति दिवस संपादित कार्य के मान से कलेक्टर द्वारा निर्धारित मजदूरी अनुसार जनपद पंचायत की स्वयं की आय से वेतन भुगतान किया जाता है जिसका कोई बिल व्हाउचर नहीं लिए जाते हैं लोक सूचना अधिकारी डिंडोरी के द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल को कलेक्टर दर की जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराया जाना भी जरूरी नहीं समझा गया स्पष्ट है कि लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा भ्रामक जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराई गई है
कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति संदेहास्पद
आवेदक त्रिलोक सिंह चौहान के द्वारा डिंडोरी जनपद पंचायत कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती के लिए जारी की गई विभाग व्दारा निविदा एवं दैनिक समाचार पत्र व कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए कितने आवेदकों के द्वारा आवेदन फॉर्म भरा गया उन सभी की संपूर्ण जानकारी की मांग की गई थी लेकिन इस पर भी पत्र में लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर अध्यक्ष महोदया के मौखिक आदेश पर रखते हुए विभागीय कार्य लिया जाता है इस पर लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा जनपद पंचायत अध्यक्ष के नाम का उल्लेख नहीं किया गया आखिर लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी किसके नाम को छुपाने की कोशिश में लगे रहे स्पष्ट है जानकारी देने में लोक सूचना अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के भी माथे से पसीना छूट रहा है आधी अधूरी जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराई गई है जो अनेक सवालों को जन्म दे रही है लोक सूचना अधिकारी के द्वारा पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती हेतु कोई निविदा प्रकाशित नहीं की गई
चंद वर्षों में करोड़ों को आसामी बना कलेक्टर दर पर कार्य करने वाला कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम
विभागीय सूत्रों की माने तो डिंडोरी जनपद पंचायत में कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने वाले पुरुषोत्तम चंदेल चंद वर्षों में ही करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर चुके हैं जिसमें विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है विभागीय सूत्रों के द्वारा बतलाया गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल विभाग में मजबूत पकड़ रखता है जिसका परिणाम यह है कि एक कलेक्टर दर पर कार्य करने वाला मामूली ऑपरेटर आज विभागीय अधिकारियों के रहमों करम के चलते करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने में सफल हो चुका है और लगातार भ्रष्टाचार का खेल निरंतर जिम्मेदारों के रहमों करम पर ही चल रहा है यहां एक ओर जब एक मामूली कंप्यूटर ऑपरेटर चंद वर्षों में करोड़ों का आसामी बन सकता है तो अधिकारी कर्मचारियों के रिकॉर्ड और संपत्ति की जांच हो जाए तो बड़े खुलासे से इंकार नहीं किया जा सकता अब देखना यह होगा की मामला प्रकाश में आने पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी कब तक और क्या संज्ञान लेते हैं ।
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