किशोरियों के हक की 25 लाख की सरकारी वेक्सीन निजी बाजार में बेची, बीएमओ डॉ. आदर्श विश्नोई पर गंभीर आरोप
- devanshbharatnews

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देवांश भारत जबलपुर। शिकायतकर्ता पत्रकार विनय जी डेविड के द्वारा बीते 16 जून को जनसुनवाई में कलेक्टर जबलपुर को पाटन के बीएमओ डॉ. आदर्श विश्नोई के द्वारा निजी बाज़ार की भारी मांग का फायदा उठाकर मासूम किशोरियों के लिए आई बेहद महंगी सरकारी वैक्सीन को खुले बाजार में बेचकर अवैध कमाई करने के संबंध में 98 पन्नों का शिकायती पुलिंदा सबूतों के साथ पेश किया।
कलेक्टर ने दिए 15 दिन में शिकायत निराकरण के आदेश

कलेक्टर की चोखट पर पहुंची इस गंभीर शिकायत पर त्वरित कार्यवाही करते हुए कलेक्टर कार्यालय ने निराकरण के लिए 15 दिवस की समय-सीमा तय कर आगे की कार्यवाही हेतु फाइल को सीधे सीएमएचओ की ओर बढ़ा दिया।
सीएमएचओ ने 3 दिन में जबाव देने का दिया अल्टीमेटम

सीएमएचओ डॉ नवीन कोठारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कढ़ा रुख अख्तियार करते हुए पत्र क्रमांक 7203 दिनांक 18 जून 2026 के द्वारा डॉ. आदर्श विश्नोई को निर्देशित किया कि वे जनसुनवाई में कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त शिकायत का बिंदुवार जवाब 03 दिनों के भीतर प्रस्तुत करें। पारदर्शिता बरतते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस पत्र की प्रति सीधे शिकायतकर्ता विनय जी डेविड को भी सूचनार्थ भेजी ताकि मामले में कोई लीपापोती न हो सके।
कैसे 800 मासूम बच्चियों की जिंदगी दांव पर लगाकर रचा गया 25 लाख का खेल!
दरअसल, जबलपुर के पाटन विकासखंड की 14-15 वर्ष की किशोरियों को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खतरे से बचाने के मकसद से सरकार द्वारा गार्डासिल-4 वैक्सीन के 1589 डोज मुफ्त लगाने हेतु उपलब्ध कराए गए। गौरतलब है कि आज भी मार्केट में यही वेक्सीन ऑनलाइन 3534 रूपए की मिल रही है।
सरकारी दवा को शातिराना अंदाज में कागजों पर खपा दिया
डॉ. आदर्श विश्नोई की नजर इस महंगी वैक्सीन पर थी। उन्होंने उसे बाजार में बेचकर अवैध कमाई करने की गहरी साजिश रची जिसकी परत-दर-परत कहानी बेहद चौंकाने वाली है। पहले तो डॉ विश्नोई ने पाटन की अपने अधीनस्थ 30 एनएम और 210 आशाओं यानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को हितग्राहियों की फर्जी सूची प्रदान की जाकर झूठे निर्देश दिए कि इन बच्चियों का वेक्सीनेशन ब्लाक मुख्यालय में पहले ही कर दिया गया है इसलिए सिर्फ उनका नाम यूविन वैक्सीनेशन पोर्टल में दर्ज कर दिया जाए। फलस्वरूप बीएमओ के मातहतों द्वारा दबाव में आकर यूविन पोर्टल पर बालिकाओं के वास्तविक हितग्राही बच्चियों के माता-पिता के असली मोबाइल नंबरों को छिपा दिया गया। उनकी जगह एएनएम या आशा कार्यकर्ताओं के या अन्य फर्जी मोबाइल नंबरों को पोर्टल पर दर्ज कर किया गया। उस नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर न केवल फर्जी वैक्सीनेशन की एंट्री की गई बल्कि सॉफ्टवेयर से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र भी जनरेट कर लिए गए ताकि रिकॉर्ड में सब सच दिखे। उल्लेखनीय है कि पाटन विकास खण्ड में वेक्सीन लगाने से लेकर वैक्सीन स्टोरेज का काम करने वाले सारे कर्मचारी बीएमओ डॉ विश्नोई के प्रशासनिक नियंत्रण में इनके अधीनस्थ रहते हुए उनके निर्देशों पर ही सारा टीकाकरण अभियान संपादित करते हैं।
ऐसे तोड़ा गया यूविन सॉफ्टवेयर का सुरक्षा चक्र
चूंकि यूविन सॉफ्टवेयर नियमानुसार एक मोबाईल नम्बर पर अधिकतम 10 ओ.टी.पी. प्राप्त करने की अनुमति देता है, इसलिए डॉ विश्नोई के मातहतों द्वारा 1 मोबाइल नंबर पर अधिकतम 10 ओ.टी.पी. लेकर 10 फर्जी हितग्राहियों के नाम सरकारी वैक्सीनेशन पोर्टल पर दर्ज कर दिए गए।
डॉ विश्नोई ने तैयार की फर्जी प्रगति रिपोर्ट
डॉ. विश्नोई ने शासन को पाटन विकासखंड में 100 प्रतिशत टीकाकरण की फर्जी दैनिक प्रगति रिपोर्ट सीएमएचओ को भेज दी, जिसमें 1589 बालिकाओं को टीका लगाने का झूठा कागजी दावा किया गया। जबकि हकीकत में इनमें से करीब 800 बालिकाओं को ही टीका लगा।
सरकारी डॉक्टर या सफेदपोश अपराधी?

इस वैक्सीनेशन घोटाले के कारण जहां एक ओर लगभग 800 हितग्राही बालिकाएं जीवनरक्षक टीके से वंचित होने के कारण वे आज भी बिना सुरक्षा के कैंसर के खतरे के साये में जी रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके हक की करीब 25 लाख रूपए मूल्य की 50 प्रतिशत एचपीवी वैक्सीन को खुले बाजार और निजी नर्सिंग होम में बेच दिया गया। इस प्रकार डॉ. विश्नोई ने लोक सेवक होते हुए भी अमानत में खयानत, सरकारी वैक्सीन की कालाबाजारी, शासन और जनता के साथ धोखाधड़ी, फर्जी डेटा एंट्री, मासूम बच्चियों की असली पहचान को छिपाकर उनकी जाली पहचान और गलत फोन नंबर का इस्तेमाल कर उन्हें उनके हक से वंचित करने, बिना वैक्सीन लगाए फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट जनरेट करने, वरिष्ठ अधिकारियों को जानबूझकर झूठी सूचना देने व सौ प्रतिशत लक्ष्य की फर्जी तालिका बनाने और लाभार्थियों के झूठे रिकॉर्ड तैयार कर भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों की धज्जियां उड़ाते हुए अनेक संगीन अपराध किए।
एक ही मोबाइल नंबर पर ब्राह्मण, मुस्लिम, पिछड़ा वर्ग और जैन समाज की 6 बेटियां। यूविन पोर्टल ने खोली महाघोटाले की पोल

यह फर्जीवाड़ा इतना कच्चा है कि इसे पकड़ने के लिए किसी बड़ी जांच एजेंसी की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ एक सर्च ही इस पूरे अपराध का पर्दाफाश करने के लिए काफी है। वतौर उदाहरण यदि यूविन पोर्टल पर एक हितग्राही के एक ही मोबाइल नंबर जैसे कि 9109769409 को सर्च में डाला जाए तो इस नंबर पर अलग-अलग जाति और धर्म के 6 परिवारों के नाम पर रजिस्टर 6 बेटियों के अलग-अलग उम्र के पंजीयन दिखाई देते हैं। इस सूची में पहले नंबर पर निधि शर्मा (ब्राह्मण समाज), फिर आलिया (मुस्लिम समाज), फिर ज्योति, फिर स्नेहा लोधी (पिछड़ा वर्ग), फिर कृष्णा और फिर रश्मि जैन (जैन समाज) अंकित है।
वंचित बालिकाओं के तुरंत टीकाकरण की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि वैक्सीन से वंचित किशोरियों का टीकाकरण करवाकर उन्हें बच्चेदानी के कैंसर के खतरे से महफूज किया जाए। जितनी भी एच.पी.वी. वैक्सीन पाटन बी.एम.ओ. द्वारा छिपाकर रखी गई है, उसे फौरन जब्त किया जाए ताकि वह खुले बाजार में बेची न जा सके और अब तक बेची जा चुकी वैक्सीन की कीमत डॉ. विश्नोई की जेब से वसूल करने की कार्रवाई की जाए। साजिश रचने वाले डॉ. विश्नोई के जुर्मों और गड़बड़ियों के खिलाफ आपराधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाए।
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