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जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में 1.33 करोड़ का घोटाला कलेक्टर की जांच टीम ने आरोप सत्य पाए — दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज


देवांश भारत जबलपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में हुए 1.33 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो गया है।

शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन जबलपुर ने तत्काल जांच टीम गठित की। कलेक्टर जबलपुर द्वारा भेजी गई जांच टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की और शिकायत के सभी आरोपों को सही पाया। अब आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और 1.33 करोड़ की वसूली की कार्यवाही शुरू की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

समाजसेवी अरविंद मिश्रा ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध शाखा और कलेक्टर जबलपुर को शिकायत देकर आरोप लगाए कि एनएचएम कार्यालय स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी ने सीएमएचओ के साथ मिलीभगत करते हुए मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में कलेक्टर जबलपुर की अनुमति के बिना और भण्डार क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करोड़ों रुपये के क्रय आदेश जारी करने की कार्यवाही की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि न तो किसी ने माँग पत्र दिया, न कोई सामग्री जिला स्टोर में रिसीव हुई और न कोई काम पूरा हुआ फिर भी फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया! और तो और एक एक्टिविटी के लिए आया पैसा दूसरी एक्टिविटी पर अनाधिकृत तरीक़े से खर्च कर दिया गयाl

 आदित्य तिवारी DPM
आदित्य तिवारी DPM

घोटाले के मुख्य बिंदु

  • सिंह इंटरप्राइजेज भोपाल को बिना कलेक्टर की अनुमति के 82.51 लाख का क्रय आदेश जारी कर भुगतान भी कर दिया—प्रचार प्रसार सामग्री आज तक रिसीव नहीं हुई।


  • जबलपुर की शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में बिना रंगाई-पुताई किए, बिना कंप्यूटर सामग्री दिए — 51.30 लाख का फर्जी भुगतान।


  • जबलपुर की ट्रेडर्स फर्म को 25 लाख से अधिक का भुगतान — वर्क ऑर्डर 02 मार्च को जारी हुआ और मात्र चौथे दिन बिल लगा दिया गया! क्या 25 लाख का मरम्मत कार्य 3 दिन में संभव है?


  • जबलपुर की फर्मों से कंप्यूटर सामग्री ली ही नहीं गई — सीएमएचओ स्टोर में कोई एंट्री तक नहीं।


एनएचएम कार्यालय, विक्टोरिया हॉस्पिटल में जिला लेखा प्रबंधक से जांच टीम ने पंचनामा बनाकर भुगतान की फाइल से जुड़े सभी दस्तावेज ले लिए है।

सीएमएचओ स्टोर कीपर के स्टॉक रजिस्टर में दर्ज प्रचार प्रसार सामग्री स्टोर में नहीं पाई गई।


विशेषज्ञों की राय

"यह मामला सुनियोजित तरीके से किया गया शासकीय धन का गबन है। बिना सामग्री लिए भुगतान और बिना अनुमति के करोड़ों के आदेश यह सीधे-सीधे गबन की श्रेणी में आता है।"

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