मक्का की सुरक्षा पर पाकिस्तान का बड़ा बयान, ख्वाजा आसिफ बोले—‘समझौते की जरूरत नहीं’
मक्का की सुरक्षा पर पाकिस्तान का बड़ा बयान, ख्वाजा आसिफ बोले—‘समझौते की जरूरत नहीं’
Devansh Bharat News 24x7 | विश्व समाचारनई दिल्ली | 17 सितंबर 2026

मक्का की सुरक्षा को लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर मक्का या अन्य पवित्र स्थलों पर हमला होता है, तो उनकी सुरक्षा के लिए किसी औपचारिक समझौते की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थलों की रक्षा करना मुसलमानों का धार्मिक दायित्व है।
मक्का रक्षा समझौते को लेकर क्या बोले ख्वाजा आसिफ?
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान मक्का रक्षा समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए किसी समझौते पर निर्भरता जरूरी नहीं है।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब ने मक्का के आसपास ड्रोन हमले की कोशिश का दावा किया है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक एयर डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन को शहर के दक्षिण में नष्ट किया। हालांकि, हूती संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है, इसलिए हमले के स्रोत को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की रक्षा समझौता क्या है?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने पिछले महीने एक त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जा सकता है। तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा क्षमता और सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की बात कही है।
हालांकि, इस समझौते के तहत किसी विशेष स्थिति में सैन्य कार्रवाई कब, कहां और किस रूप में होगी, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भी कहा है कि वह समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सैन्य कार्रवाई से जुड़ी रणनीतिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
हूती हमलों के बीच बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान के लिए भी स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। Reuters के अनुसार, पाकिस्तान एक ओर सऊदी अरब के साथ रक्षा साझेदारी निभा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है।
पाकिस्तान का कहना है कि क्षेत्र में तनाव को और फैलने से रोकने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्या बदला पाकिस्तान का रुख?
पाकिस्तान के हालिया बयानों में एक ओर मक्का रक्षा समझौते के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई गई है, वहीं ख्वाजा आसिफ का यह कहना कि पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए किसी समझौते की आवश्यकता नहीं है, धार्मिक दायित्व पर जोर देता है। ऐसे में पाकिस्तान की नीति में सऊदी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं और क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित करने के कूटनीतिक प्रयास—दोनों दिखाई दे रहे हैं।
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