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मामूली कम्प्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चन्देल करोड़ों कि चल अचल संपत्ति का मालिक अनुमानित 15 लाख रुपए साल के हिसाब से 7 साल में अर्जित की अवैध संपत्ति

भ्र्ष्टाचार का जिन्न, जाँच,कार्यवाही में कब होगा कैद

भृष्ट कम्प्यूटर ऑपरेटर पर कार्यवाही करने से विभागीय जिम्मेदार कर रहे परहेज?


डिंडोरी देवांश भारत ! संपादक प्रशांत वैश्य जबलपुर, ब्लॉक रिपोर्टर डिंडोरी त्रिलोक चौहान । मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है जिस पर अंकुश फिलहाल तो लगता दूर दूर तक नजर नहीं आता भ्रष्टाचार का यह खेल वर्षों से अनवरत जारी है, जिसकी जानकारी विभागीय हुक्मरानों को होने के बावजूद जिम्मेदार ही मौन धारण कर इस खेल का लुफ्त जिम्मेदारी कि कुर्सी पर बैठ कर उठाने में पीछे नहीं हैं विभागीय जानकर सूत्रों की मानें तो भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मी इन अधिकारियों व्दारा की जाने बाली फरमाइश को पूरा करने के साथ ही सेवा खुशामद में कमी नही रखता परिणाम स्वरूप वर्षों से चलता आ रहा भ्रष्टाचार का यह खेल आज भी जारी है । अभी तक जनपद पंचायत कार्यालय में हुए इस बड़े भ्रष्टाचार कि अगर परत खुली तो अनेक बड़े सफेदपोशों के नाम और चेहरे उजागर होने से इंकार नही किया जा सकता, फिलहाल करोड़ों के घोटाले पर ईमानदारी की परत चढ़ाने की कवायद पर तेजी से कार्य किया जा रहा है



चंद रोज में ही दिखाया रंग, पुरुषोत्तम चन्देल ने कर दी मनरेगा में गड़बड़ी

विभागीय सूत्रों की माने तो जनपद पंचायत डिंडोरी में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल कि नियुक्ति मौखिक तौर पर सन 2012-13 में एक विभागीय अधिकारी के व्दारा की गई थी कम्प्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चन्देल को जनपद पंचायत डिंडोरी कि मनरेगा शाखा में एम आई एफ करने का कार्य सौपा गया,मनरेगा शाखा में लगभग एक से डेढ़ वर्ष तक कार्य करने के दौरान चन्देल ने गड़बड़ी सुरु कर दी जिसकी भनक तत्कालीन मनरेगा शाखा अधिकारी को लगने पर पुरुषोत्तम चन्देल को कार्य से हटा जनपद डिंडोरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । तो वही जानकर सूत्र बतलाते हैं कि लगभग छः महीने बाद पुरुषोत्तम चन्देल ने अपनी गलती स्वीकारी एंव दोबारा कभी शिकायत का मौका न देने की बात पर तत्कालीन अधिकारी ने कंप्यूटर ऑपरेटर चन्देल को माफी देते हुए कार्य पर पुनः ले लिया इस दौरान जनपद कार्यालय में पुरुषोत्तम चन्देल से छोटे हल्के कार्य लिए जाने लगे ।



2018 से भ्र्ष्टाचार, करोड़ों कि संपत्ति अर्जित


विभागीय सूत्र बतलाते हैं कि कम्प्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चन्देल के व्दारा तीन वर्ष तक विभागीय कर्मचारियों एंव अधिकारियों के बीच में अपना विश्वास बनाया जिससे कम्प्यूटर ऑपरेटर चन्देल कि विभागीय स्तर पर पेंठ मजबूत होती चली गई तो वही 2018 में तत्कालीन डिंडोरी जनपद पंचायत सीईओ वर्षा झारिया के कार्यकाल सम्हालते ही कम्प्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चन्देल ने आधिकारिक सोर्स का फायदा उठा जनपद पंचायत डिंडोरी के वित्तीय कार्यो को अपने हांथो में ले लिया तीन वर्षों के इंतजार के बाद वित्तीय कार्य देखने बाले पुरुषोत्तम चन्देल इन सात सालों में करोड़ो कि चल अचल संपत्ति अर्जित कर चुके हैं, सवाल यह है कि इन सात सालों में ऐसा कैसा भ्र्ष्टाचार हुआ जो जिला पंचायत डिंडोरी सहित जनपद पंचायत के विभागीय अधिकारियों को समझ नही आया लेकिन मामूली सा कम्प्यूटर ऑपरेटर सात वर्ष में करोड़ों का मालिक बन गया जबकि जानकार बतलाते हैं कि पुरुषोत्तम चन्देल को सैलरी इतनी मिलती है जितना उसकी कार एक हफ्ते में पेट्रोल पी जाती है



कंप्यूटर ऑपरेटर चन्देल रखते हैं राजनीतिक रसूख


विभागीय सूत्रों की माने तो जनपद पंचायत डिंडोरी को भ्र्ष्टाचार का गढ़ बनाने बाले भृष्ट कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चन्देल ने अपने काले कारनामो को छुपाए रखने के लिए एक राजनीतिक दल के नेताओ से संपर्क बढ़ाना सुरु कर दिया चंद वर्षों में ये हालात है कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल इन नेताओं और पार्टी में मजबूत पकड़ रखता है आलम तो ये है की नेता जी के व्दारा लगाई गई पुकार पर भृष्ट कम्प्यूटर ऑपरेटर चन्देल जी हुजूरी करने के लिए निकल पड़ता है भृष्ट कम्प्यूटर ऑपरेटर को नेताओं का संरक्षण प्राप्त है जिसका फायदा उठाते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर फर्श से अर्श तक का सफर तय कर चुका है इस दौरान जनपद पंचायत डिंडोरी में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत पुरुषोत्तम चंदेल के द्वारा करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है जो आने बाले दिनों में खबर में देखने को मिलेगी


भ्रष्ट अशासकीय कर्मी पर क्या कहते हैं जानकार


भ्रष्ट शासकीय कार्यालय में कार्यरत अशासकीय कर्मी के ऊपर तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की कार्यवाही विभाग प्रमुख के व्दारा की जा सकती है,तो वही अशासकीय कर्मी के खिलाफ विभागीय जांच करने के निर्देश प्राप्त कर अधिकारियों व्दारा अग्रिम कार्यवाही शुरू की जा सकती है,अशासकीय कर्मी को दंड दिया जा सकता है जैसे की उसका वेतन रोकना सहित अन्य, मामला गंभीर हो तो अशासकीय कर्मी को बर्खास्त भी किया जा सकता है,विभागीय अधिकारियों के व्दारा अशासकीय कर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है, अशासकीय कर्मी के द्वारा गलत तरीके से अर्जित की गई चल अचल संपत्ति को जप्त किया जा सकता है, अशासकीय कर्मी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है जैसे कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्यवाही


प्रावधानित अधिनियम


(1) भ्र्ष्टाचार निरोधक अधिनियम,1988 इस अधिनियम के तहत भ्र्ष्टाचार के मामलों में अशासकीय कर्मी के खिलाफ कार्यवाही कि जा सकती है।

(2)शासकीय सेवा (आचरण)नियम,1964 इस नियम के तहत, अशासकीय कर्मी के आचरण के लिए नियम और दंड का प्रावधान है।

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