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सरकार के हाथों में खेल रही है बिजली कंपनियां। चुनाव वर्षों में कम घाटा बताया और बिजली के रेट नहीं बढ़ाए इस वर्ष चुनाव नहीं है तो भारी घाटा बताकर लगभग 8 प्रतिशत रेट बढ़ाये।

4 जन॰ 2025
1 मिनट पठन

जबलपुर। म.प्र. की बिजली कंपनियां सत्ता पक्ष के हाथों में खेल रही है। यह खुलासा बिजली कंपनियों द्वारा विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत याचिका के पृष्ठ 150 में किये गये विवेचना के माध्यम से सामने आया है।

वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर घाटा कम बताया जिससे बिजली रेट 2 प्रतिशत से भी कम 1.65 प्रतिशत बढ़ाये, वहीं वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के कारण घाटा न के बराबर बताया, परिणामस्वरूप बिजेनी रेट 1 प्रतिशत से भी कम 0.7 प्रतिशत बढ़ाये।

और अब वर्ष 2025 में चुनाव नहीं होने के कारण 4107 करोड़ का भारी भरकम घाटा बताकर 7.52 प्रतिशत रेट बढ़ाये, कृषि क्षेत्र के लिए तो 8.3 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है।


जबलपुर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, महिला समिति. सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन, किसान समिति, पेंशनर समाज आदि संगठनों ने बैठक आयोजित कर म.प्र. सरकार तथा बिजली कंपनियों के मिलीभगत की भर्त्सना की। उन्होंने बिजली के रेट बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ आन्दोलन की घोषणा की है जिसकी शुरूआत 9 जनवरी से की जायेगी।


बैठक में डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, टी. के. रायघटक, डी.के. सिंह, सुभाष चन्द्रा, सुशीला कनौजिया, राजेश गिदरौनिया, कैलाश पटेल, पी.एस. राजपूत, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, एड. जी.एस. सोनकर, एड. प्रभात यादव, संतोष श्रीवास्तव, माया कुशवाहा, गीता पांडे, दीपमाला बमनेला, उमा दाहिया, एम. के. नेमा, लखनलाल प्रजापति, राजेश सेंगर, प्रवीण पटेल, अर्जुन कुमार, नंदकिशोर सोनकर, गेंदालाल कुशवाहा, दिलीप कुन्डे, चेतराम, डी.आर. लखेरा, पन्नालाल पटेल, सुभाष कोरी, ममता हरदहा, रंजना मौर्य, विनोद पटेल, एड. बृजेश साहू, उदय गजानंद परांजपे, राजेन्द्र कुमार मिश्रा आदि भारी संख्या में उपस्थित थे।


जबलपुर से कार्तिक गुप्ता की रिपोर्ट

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